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Written by अम्बरीष राय
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Thursday, 29 March 2012 13:46 |
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मुसलमान होना गुनाह? कहीं धमाके हुये नहीं कि कोई मोहम्मद, अहमद, सुलेमान उसके मास्टर माइण्ड के रूप में खड़ा कर दिया जाता है. सुरक्षा एजेंसियां एक चेहरे को मास्टर माइण्ड बनाकर जब मीडिया को खबरें लीक करती हैं तो मीडिया का एक बड़ा तबका न्यायालय की भूमिका में आकर फैसला भी सुनाने लगता है. तब तक उसी धमाके में एक और गिफ्तारी होती है, फिर मास्टर माइण्ड का खिताब पहले से छीनकर दूसरे को दे दिया जाता है. फिर पूरी बेशर्मी से दूसरे मास्टर माइण्ड का पोस्ट-मार्टम शुरू हो जाता है. लगता है मुसलमान होना गुनाह हो गया है इस देश में’ यह सुनकर धक्का सा लगा. क्या हो गया जो एक बुजुर्गवार इस तरह की बात कह रहा है? तफसील में गया तो मानो जख्मों से खून रिसने लगा हो. बूढ़ी आंखों के दर्द बस डबडबा कर रह गये. मोहम्मद सलीम! उनका यही नाम था. उन्होंने कहा कि हमारा वतन हिन्दुस्तान, हमारा करम हिन्दुस्तान लेकिन हुकूमत, लगता है किसी दूसरे देश की, किसी दूसरे नज़रिये की है. |
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